जानिए दिवाली पर कितने बजे तक पटाखे जला सकते हैं? और कितने दीये जलाने चाहिए यहां जानिए

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लोग आतिशबाजी के साथ दिवाली मनाते हैं। दिवाली पर कब तक आतिशबाजी की जा सकती है, इसको लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। दिवाली के त्योहार के दौरान रात 8 बजे से रात 10 बजे तक आतिशबाजी की जा सकती है। साथ ही नए साल की पूर्व संध्या पर रात 11.55 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक आतिशबाजी की जा सकेगी. राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, लोगों को केवल हरे और मान्यता प्राप्त आतिशबाजी को उड़ाने की अनुमति है।

इस संबंध में सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी किया है। सरकार की ओर से घोषणापत्र में यह स्पष्ट किया गया है। इस घोषणा से एक बात साफ है कि दिवाली के अलावा किसी भी दिन रात में आतिशबाजी करना गैर कानूनी होगा। पटाखों की बिक्री के मामले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हरे और मान्यता प्राप्त पटाखों को बेचा जा सकता है लेकिन अन्य आतिशबाजी नहीं बेची जा सकती।

वहीं, घोषणापत्र में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को साइलेंट जोन माना जाएगा. ताकि इस क्षेत्र में आतिशबाजी न की जा सके। आतिशबाजी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी तरफ किसी भी तरह के विदेशी पटाखों का आयात और उन्हें बेचने की मनाही है.

दूसरी ओर, पेट्रोल पंप, एलपीजी पंप, गैस भंडारण या अन्य ज्वलनशील पदार्थ गोदामों या ऐसी जगहों पर जहां पटाखे नहीं जलाए जा सकते। चाइनीज तुक्कल और पटाखों के उत्पाद जो बिक नहीं सकते। चीनी तुक्कल को उड़ाया नहीं जा सकता। बिजली के खंभों के पास 50 वर्ग फुट के दायरे में पटाखे और गोला-बारूद नहीं फेंके जा सकते। इस घोषणा का उल्लंघन करने वाले पर गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 131 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक सड़कों पर नाकाबंदी पर भी रोक लगा दी गई है.

पहला दीया रात में सोते वक्त यम का दिया जो पूराना होता है और जिसमें सरसों का तेल डालकर उसे घर से बाहर दक्षिण की ओर मुख कर कूड़े के ढेर के पास रखा जाता है। दूसरा दीया किसी सुनसान देवालय में रखा जाता है जोकि घी का दिया होता है। इसे जलाने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

तीसरा दीया माता लक्ष्मी के समक्ष जलाते हैं। चौधा दीया माता तुलसी के समक्ष जलाते हैं। पांचवां दीया घर के दरवाजे के बाहर जलाते हैं। छठा दीया पीपल के पेड़ के नीचे जलाते हैं। सातवां दीया किसी मंदिर में जलाकर रख दें। आठवां दीया घर में कूड़ा कचरा रखने वाले स्थान पर जलाते हैं। नौवां दीया घर के बाथरूम में जलाते हैं

दसवां दीया घर की छत की मुंडेर पर जलाते हैं।ग्यारहवां दीया घर की छत पर जलते हैं। बारहवां दीया घर की खिड़की के पास जलाते हैं। तेरहवां दीया- घर की सीढ़ियों पर जलाते हैं या बरामदे में। चौदहवां दीया रसोई में या जहां पानी रखा जाता है वहां जलाकर रखते हैं।