दुनिया के अमीरों के लिए टैक्स बचाना होगा मुश्किल, गूगल, अमेजन फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों से मिलता है बहुत कम टैक्स

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वैश्विक न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स (ग्लोबल टैक्स)के बारे समझौता अंतिम चरण में है। इसपर 130 से अधिक देशों ने समझौता किया है जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सदस्य शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इसके लागू होने के बाद फेसबुक, गूगल और अमेजन समेत दिग्गज वैश्विक कंपनिुयों को अब हर साल अरबों डॉलर का अधिक टैक्स देना होगा। फिलहाल विकसित देशों को गूगल, एमेजन फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों से बहुत कम टैक्स मिलता है। इसके लागू होने के बाद उन पर भारत को 15 फीसदी तक का टैक्स लगाने की शक्ति भी मिल जाएगी।

किस देश में अमीरों पर कितना टैक्स

देश टैक्स की दर (%में): भारत 42.7,ब्रिटेन 45,फ्रांस 66,जर्मनी 45,जापान 45.9,चीन 45,आयरलैंड 48,दक्षिण अफ्रीका 45,कनाडा 54,आयरलैंड 48,स्वीडन 57,ऑस्ट्रिया 55

क्या है ग्लोबल टैक्स: ग्लोबल टैक्स को ही ग्लोबल डिजिटल टैक्स और ग्लोबल मिनी टैक्स कहा जा रहा है। दरअसल यह कॉर्पोरेट टैक्स है जो कंपनियों पर लगाया जाता है। इसकी दरें अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं। इसे वर्ष 2023 से लागू करने की योजना बनाई गई है।कहा जा रहा है कि ग्लोबल टैक्स के लागू होने के बाद विश्व की बड़ी कंपनियां केवल उन देशों को टैक्स नहीं देंगी जहां वह मूल रूप से स्थित हैं, बल्कि उन देशों को भी टैक्स का भुगतान करेंगी जहां वो काम करती हैं।

भारत की क्या है स्थिति: भारत में अभी कॉर्पोरेट टैक्स की दर 22 फीसदी है जो पहले 28 फीसदी है। इसे धीरे-धीरे घटाकर 15 फीसदी पर लाने की योजना पर काम चल रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को आर्कषित करने के मद्देनजर ग्लोबल डिजिटल टैक्स की न्यूनतम दर भारत के लिए नुकसानदायक नहीं है। दूसरी ओर फेसबुक,गूगल जैसी कंपनियां अपना मुख्यालय कम टैक्स वाले देशों में बनाकर भारत में कारोबार कर रही हैं लेकिन उन्हें भारत में भी 15 फीसदी टैक्स चुकाना होगा।

भारत की क्या है स्थिति: भारत में अभी कॉर्पोरेट टैक्स की दर 22 फीसदी है जो पहले 28 फीसदी है। इसे धीरे-धीरे घटाकर 15 फीसदी पर लाने की योजना पर काम चल रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को आर्कषित करने के मद्देनजर ग्लोबल डिजिटल टैक्स की न्यूनतम दर भारत के लिए नुकसानदायक नहीं है। दूसरी ओर फेसबुक,गूगल जैसी कंपनियां अपना मुख्यालय कम टैक्स वाले देशों में बनाकर भारत में कारोबार कर रही हैं लेकिन उन्हें भारत में भी 15 फीसदी टैक्स चुकाना होगा।

सभी देशों को राजस्व में हिस्सेदारी: इसका मकसद टैक्स हैवेन्स का इस्तेमाल कर कंपनियों को उन देशों को टैक्स राजस्व से वंचित करने से रोकना है, जहां वह कारोबार करती हैं। साथ ही इस समझौते का मकसद दुनिया की 100 बड़ी कंपनियों को टैक्स चोरी से रोकना है। इन कंपनियों को अब अपनी आमदनी पर न्यूनतम 15 फीसदी टैक्स देना होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी वजह से विभिन्न देशों के खजाने में हर साल अतिरिक्त 150 डॉलर आएंगे। इसके अलावा 125 अरब डॉलर की वसूली भी होगी, जिसे समझौते में शामिल देशों के बीच बांटा जाएगा।

फायदे में रहेंगे बड़े देश: विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कॉर्पोरेट टैक्स व्यवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका और यूरोपीय यूनियन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को हो रहा है। ज्यादातर बड़ी कंपनियां वहीं की हैं। लेकिन वह टैक्स हैवेन्स में अपने मुख्यालय दर्ज करवा कर टैक्स बचाती रही हैं। इस समझौते से ज्यादातर नया राजस्व उनके हिस्से में जाएगा। जबकि दूसरे देशों की अपने यहां टैक्स दरें तय करने और अपने टैक्स आधार की रक्षा करने की क्षमता इससे कमजोर पड़ेगी।’

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